Posted by: Avanish on: April 16, 2009
संग हर शख्स ने हाथों में उठा रखा है जब से तुने मुझे दीवाना बना रखा है || उसके दिल पे भी कड़ी इश्क में गुजरी होगी नाम जिसने भी मुहब्बत का सज़ा रखा है || पत्थरों आज मेरे सर पे बरसते क्यूँ हो मैंने तुमको भी कभी अपना खुदा रखा है || पी जा [...]
Posted by: Avanish on: September 27, 2008
हैं और भी दुनिया में सुखनवर बहुत अच्छे कहते हैं के गालिब का है अंदाज़-ऐ-बयां और || We will talk about my favourite shayer Mirza ghalib sahab. Ghalib had been the best gem ever read after meer taqui meer. His poetry is full of philosophy though bit tough to understand as it’s full of arabic [...]
Posted by: Avanish on: June 23, 2008
मेरी कुछ पसंदीदा अशार-औ-गज़लें…….. मजे जो मौत के आशिक बयां कभू करते मसीह-ओ-खिज्र भी मरने की आरजू करते| अगर यह जानते चुनचुन के हमको तोड़ेंगे तो गुल कभी ना तमन्ना-ऐ-रंग-ओ-बू करते || उल्फत का नशा जब कोई मर जाए तो जाये यह दर्द-ऐ-सर ऐसा है के सर जाये तो जाये|| पहले बुतों के इश्क में [...]